हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 23.33

अध्याय 23 → मंत्र 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
गा॒य॒त्री त्रि॒ष्टुब्जग॑त्यनु॒ष्टुप्प॒ङ्क्त्या स॒ह।बृ॒ह॒त्युष्णिहा॑ क॒कुप्सू॒चीभिः॑ शम्यन्तु त्वा ॥ (३३)
हे यज्ञाग्नि! हम गायत्री, त्रिष्टुप्‌, जगती, अनुष्टुप्‌, पंक्ति, बृहती, उष्णिक्‌, ककुप्‌ छंद व सूचियों से आप को शांत करते हैं. आप शांत होने की कृपा कीजिए. (३३)
O yajnaagni! We calm you down with Gayatri, Trishtup, Jagati, Anushtup, Row, Brihati, Yoshik, Kakup verses and lists. Please calm down. (33)