हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 23.5

अध्याय 23 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुषः॑। रोच॑न्तेरोच॒ना दि॒वि ॥ (५)
सूर्य जैसे स्वर्गलोक को प्रकाशित करते हैं और जैसे अपने चारों ओर के ग्रह को जोड़ते हैं, वैसे ही यजमान यज्ञ के सारे साधनों को जोड़ते हैं. (५)
Just as the sun illuminates the heavenland and just as it connects the planet around it, the hosts connect all the means of yajna. (5)