यजुर्वेद (अध्याय 23)
प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ रू॒पाणि॒ परि॒ ता ब॑भूव।यत्का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ऽअस्तु व॒यꣳ स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (६५)
हे प्रजापति! आप के अलावा कोई दूसरा उतने विशव रूपों वाला नहीं हो सकता. हम जिस कामना से यज्ञ करते हैं, हमारी वह कामना पूर्ण हो. हम धनों के स्वामी हो जाएं. (६५)
O Lord! No one can be as diverse as you. May the desire with which we perform yajna be fulfilled. Let us become masters of wealth. (65)