यजुर्वेद (अध्याय 25)
यदश्व॑स्य क्र॒विषो॒ मक्षि॒काश॒ यद्वा॒ स्वरौ॒ स्वधि॑तौ रि॒प्तमस्ति॑।यद्धस्त॑योः शमि॒तुर्यन्न॒खेषु॒ सर्वा॒ ता ते॒ऽअपि॑ दे॒वेष्व॑स्तु ॥ (३२)
जिस अश्व का बचाखुचा भाग मक्खियां खाती हैं, जो भाग यजमान के हाथों और अंगुलियों में लगा रहता है, वह सब भी देवताओं के प्रति समर्पित हो. (३२)
The remaining part of the horse that flies eat, the part that is planted in the hands and fingers of the host, should also be dedicated to the gods. (32)