यजुर्वेद (अध्याय 26)
ऋ॒तव॑स्ते य॒ज्ञं वित॑न्वन्तु॒ मासा॑ र॒क्षन्तु॑ ते॒ हविः॑। सं॒व॒त्स॒रस्ते॑ य॒ज्ञं द॑धातु नः प्र॒जां च॒ परि॑ पातु नः ॥ (१४)
सभी ऋतुएं यज्ञ का विस्तार करने की कृपा करें. मास हमारी हवि की रक्षा करने की कृपा करों. संवत्सर यज्ञ को धारण करने की कृपा करें. हम सभी प्रजाजनों का परिपालन करने की कृपा कीजिए. (१४)
Please extend the yajna in all seasons. May the month bless us with the protection of havi. Please wear the Samvatsar Yajna. Please take care of all the people. (14)