यजुर्वेद (अध्याय 26)
वै॒श्वा॒न॒रो न॑ ऊ॒तय॒ऽआ प्र या॑तु परा॒वतः॑। अ॒ग्निरु॒क्थेन॒ वाह॑सा। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि वैश्वान॒राय॑ त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्वैश्वान॒राय॑ त्वा ॥ (८)
वैश्वानर यहां पधारें, वैश्वानर सब ओर से अपने रक्षा साधनों से हमारी रक्षा करने की कृपा करें. उक्थ रूपी वाहन द्वारा अग्नि की उपासना करते हैं. हम आप को उपयाम में ग्रहण करते हैं. बही आप का मूल स्थान है. (८)
May Vaishnavar come here, May Vaishnavar please protect us from all sides with his defense tools. They worship agni through a vehicle in the form of a uchth. We accept you in the upayam. The book is your native place. (8)