यजुर्वेद (अध्याय 27)
द्वारो॑ दे॒वीरन्व॑स्य॒ विश्वे॑ व्र॒ता द॑दन्तेऽ अ॒ग्नेः।उ॒रु॒व्यच॑सो॒ धाम्ना॒ पत्य॑मानाः ॥ (१६)
हे अग्नि! आप देवों का द्वार, व्रतशील व वर्चस्वी हैं. आप हम सभी की रक्षा करते हैं. (१६)
O agni! You are the door of the gods, fasting and dominating. You protect all of us. (16)