हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 27.30

अध्याय 27 → मंत्र 30 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वायो॑ शु॒क्रोऽ अ॑यामि ते॒ मध्वो॒ऽअग्रं॒ दिवि॑ष्टिषु। आ या॑हि॒ सोम॑पीतये स्पा॒र्हो दे॑व नि॒युत्व॑ता ॥ (३०)
हे वायु! आप को शुक्र ग्रह धारण करना चाहते हैं. हे देव! आप अग्रगण्य हैं. आप स्वर्गलोक से पधारिए. आप मधुर सोमरस का पान करने के लिए तेजी से पधारिए. (३०)
O wind! You want to hold the planet Venus. O God! You are the forward. You come from heaven. You come fast to drink sweet somers. (30)