यजुर्वेद (अध्याय 27)
त्वामिद्धि हवा॑महे सा॒तौ वाज॑स्य का॒रवः॑। त्वां वृ॒त्रेष्वि॑न्द्र॒ सत्प॑तिं॒ नर॒स्त्वां काष्ठा॒स्वर्व॑तः ॥ (३७)
हे इंद्र देव! आप सत्पति व वृत्रनाशक हैं. याजक सर्वत्र विजय और अन्न बल पाने के लिए आप का आह्वान करते हैं. (३७)
O Lord Indra! You are satpati and vritrasana. The priests call upon you to gain victory and food power everywhere. (37)