हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 32.15

अध्याय 32 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
मे॒धां मे॒ वरु॑णो ददातु मे॒धाम॒ग्निः प्र॒जाप॑तिः। मे॒धामिन्द्र॑श्च वा॒युश्च॑ मे॒धां धा॒ता द॑दातु मे॒ स्वाहा॑ ॥ (१५)
बरुण, अग्नि व प्रजापति हमें बुद्दि प्रदान करें. इंद्र देव बुद्धि धारण करते हैं. वे हमें बुद्धि प्रदान करें. इन सभी देवों के लिए स्वाहा. (१५)
May Barun, Agni and Prajapati give us wisdom. Indra Dev holds wisdom. May they give us wisdom. For all these gods. (15)