यजुर्वेद (अध्याय 33)
येना॑ पावक॒ चक्ष॑सा भुर॒णयन्तं॒ जनाँ॒२ऽअनु॑।त्वं व॑रुण॒ पश्य॑सि ॥ (३२)
हे बरुण देव! आप पवित्र बनाने वाले व भरणपोषण करने बाले हैं. आप जिस दृष्टि से देखते हैं. हम भी उसी दृष्टि से (लोगों को) देखने में आप का अनुकरण करें. (३२)
O God! You are the one who purifies you and nurtures you. The way you look. Let us also emulate you in looking at (people) with the same vision. (32)