यजुर्वेद (अध्याय 33)
द्वे विरू॑पे चरतः॒ स्वर्थे॑ऽअ॒न्यान्या॑ व॒त्समुप॑ धापयेते।हरि॑र॒न्यस्यां॒ भव॑ति स्व॒धावा॑ञ्छु॒क्रोऽअ॒न्यस्यां॑ दद्य्शे सु॒वर्चाः॑ ॥ (५)
रात्रि और दिवस अपने श्रेष्ठ काम के लिए वैसे ही विचरते हैं, जैसे अलगअलग रूपरंग वाली स्त्रयां विचरती हैं. रात्रि हरी (काली) है. रात्रि के स्वधावान चमकीले पुत्र चंद्रमा हुए. दूसरी के श्रेष्ठ वर्चस्वी पुत्र सूर्य हुए. ऐसा देखा (कहा) जाता है. (५)
Nights and days travel for their best work, just as women with different forms travel. The night is green (black). Moon was the brightest son of the night. The other had the best dominant son Surya. It is seen (called). (5)