यजुर्वेद (अध्याय 33)
विश्वे॑ देवाः शृणु॒तेम॒ꣳ हवं॑ मे॒ येऽअ॒न्तरि॑क्षे॒ यऽउप॒ द्यवि॒ ष्ठ।येऽअ॑ग्निजि॒ह्वाऽउ॒त वा॒ यज॑त्राऽआ॒सद्या॒स्मिन् ब॒र्हिषि॑ मादयध्वम् ॥ (५३)
सभी देव हमारी स्तुतियां सुनने की कृपा करें. जो देव अंतरिक्ष लोक में हैं, जो देव स्वर्गलोक में हैं, वे देव भी हमारी स्तुतियां सुनने की कृपा करें. अग्निमुख वाले देव हमारी दी हुई हवि को स्वीकार करने की कृपा कें. यज्ञ में हम ने कुश के आसन उन के लिए बिछाए हैं. वे कृपया उस पर विराजें. (५३)
May all gods please listen to our praises. May the gods who are in the space world, the gods who are in heaven, also listen to our praises. May the God of Fire be pleased to accept our divine gift. In the yajna, we have laid the seats of Kush for them. They please sit on it. (53)