हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 33.59

अध्याय 33 → मंत्र 59 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वि॒दद्यदी॑ स॒रमा॑ रु॒ग्णमद्रे॒र्महि॒ पाथः॑ पू॒र्व्यꣳ स॒ध्र्यक्कः।अग्रं॑ नयत्सु॒पद्यक्ष॑राणा॒मच्छा॒ रवं॑ प्रथ॒मा जा॑न॒ती गा॑त् ॥ (५९)
अग्रगण्य श्रेष्ठ अक्षर वाले मंत्रों से यजमान देवों की उपासना करते हैं. पत्थरों से कूटकूट कर सोमरस निचोड़ा गया है. विद्वान्‌ इस सोमरस का सेवन करते हैं. (५९)
The hosts worship the gods with the mantras with the highest letters. Somerus has been squeezed with stones. Scholars consume this somras. (59)