यजुर्वेद (अध्याय 33)
उपा॑स्मै गायता नरः॒ पव॑माना॒येन्द॑वे।अ॒भि दे॒वाँ२ऽइय॑क्षते ॥ (६२)
हे यजमानो! देवताओं द्वारा चाहे गए सोमरस को तैयार कीजिए. सोमरस पवित्र है. आप उस के लिए और स्तुतियां गाइए. (६२)
O hosts! Prepare the someras desired by the gods. Somerus is holy. You sing more praises for him. (62)