यजुर्वेद (अध्याय 33)
ति॒र॒श्चीनो॒ वित॑तो र॒श्मिरे॑षाम॒धः स्वि॑दा॒सी३दु॒परि॑ स्विदासी३त्।रे॒तो॒धाऽआ॑सन् महि॒मान॑ऽआसन्त्स्व॒धाऽअ॒वस्ता॒त् प्रय॑तिः प॒रस्ता॑त् ॥ (७४)
सोम पवित्र हैं. उन की तिरछी किरणों का प्रकाश बहुत दूर तक फैलता है. वे नीचे ऊपर सब ओर व्याप्त हैं. ये किरणें वीर्य धारण करती हैं. ये किरणें महिमामयी हैं. ये ऊपर नीचे सब ओर से संसार को धारण करती हैं. (७४)
Soma is holy. The light of their oblique rays spreads far and wide. They are all over the bottom. These rays hold semen. These rays are glorious. They hold the world from all sides up and down. (74)