यजुर्वेद (अध्याय 33)
उ॒क्थेभि॑र्वृत्र॒हन्त॑मा॒ या म॑न्दा॒ना चि॒दा गि॒रा।आ॒ङ्गू॒षैरा॒विवा॑सतः ॥ (७६)
हे इंद्र देव! आप वृत्रासुर नाशक व आनंददाता हैं. हम श्रेष्ठ उक्थों (मंत्रों) से आप की आराधना करते हैं. (७६)
O Lord Indra! You are the destroyer and the giver of joy. We worship you with the best mantras. (76)