यजुर्वेद (अध्याय 33)
अपा॑धमद॒भिश॑स्तीरशस्ति॒हाथेन्द्रो॑ द्यु॒म्न्याभ॑वत्।दे॒वास्त॑ऽइन्द्र स॒ख्याय॑ येमिरे॒ बृह॑द्भानो॒ मरु॑द्गण ॥ (९५)
इंद्र देव उददंडों को दंडित करते हैं. वे हिंसा को दूर भगाते हैं. उन से सभी देवगण मित्रता चाहते हैं. हे मरुद्गण! आप की सभी देवता मित्रता चाहते हैं. हे अग्नि देव! आप की सभी देवगण मित्रता चाहते हैं. (९५)
Indra Dev punishes the udadandas. They drive away violence. All Devgans want friendship with them. O mary! All of your gods want friendship. O God of Fire! All of you want friendship. (95)