यजुर्वेद (अध्याय 33)
अ॒स्येदिन्द्रो॑ वावृधे॒ वृष्ण्य॒ꣳ शवो॒ मदे॑ सु॒तस्य॒ विष्ण॑वि।अ॒द्या तम॑स्य महि॒मान॑मा॒यवोऽनु॑ ष्टुवन्ति पू॒र्वथा॑।इ॒मा उ त्वा। यस्या॒यम्। अ॒यꣳ स॒हस्र॑म्। ऊ॒र्ध्वऽऊ॒ षु णः॑ ॥ (९७)
इंद्र देव सोमरस से मदमस्त हो कर यजमान के बल की बढ़ोतरी करते हैं. वे एवं विष्णु देव यजमान पूर्व ऋषियों की भांति ही आप की महिमा स्तोत्रों से अभिव्यक्त हैं. (९७)
Indra Dev becomes intoxicated with Someras and increases the strength of the host. He and Vishnu Dev Yajaman, like the former sages, are expressed by your glory stotras. (97)