हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 34.14

अध्याय 34 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
उ॒त्ता॒नाया॒मव॑ भरा चिकि॒त्वान्त्स॒द्यः प्रवी॑ता॒ वृष॑णं जजान।अ॒रु॒षस्तू॑पो॒ रुश॑दस्य॒ पाज॒ऽइडा॑यास्पु॒त्रो व॒युने॑ऽजनिष्ट ॥ (१४)
हे अग्नि! आप पृथ्वी से उत्पन्न हैं. ज्ञान पूर्ण कर्म से अग्नि का प्रादुर्भाव हुआ है. वे शीघ्र ही अरणि मंथन से प्रज्वलित होते हैं. वे तेजोमय व अदभुत हैं. वे वायु से और अधिक प्रसार पाते हैं. (१४)
O agni! You are born from earth. Fire has emerged through knowledgeful action. They are soon ignited by arani manthan. They are bright and amazing. They get more spread from the air. (14)