यजुर्वेद (अध्याय 34)
प्र म॑न्महे शवसा॒नाय॑ शू॒षमा॑ङ्गू॒षं गिर्व॑णसेऽअङ्गिर॒स्वत्।सु॒वृ॒क्तिभिः॑ स्तुव॒तऽऋ॑ग्मि॒यायार्चा॑मा॒र्कं नरे॒ विश्रु॑ताय ॥ (१६)
इंद्र देव शक्ति की चाह रखते हैं. वे श्रेष्ठ वाणी बाले हैं. वे विद्वान् हैं. हम अंगिरा ऋषि की ही तरह उन की स्तुति करते हैं. अच्छी स्तुतियों से हम उन की स्तुति करते हैं. मनुष्यों के नेतृत्व के लिए प्रख्यात उन की ऋग्वेद के मंत्रों से अर्चना करते हैं. (१६)
Indra Dev wants power. They are the best speeches. They are scholars. We praise him like Angira Rishi. We praise them with good praises. Renowned for the leadership of human beings, they worship them with the mantras of rigveda. (16)