यजुर्वेद (अध्याय 34)
ये नः॑ स॒पत्ना॒ऽअप॒ ते भ॑वन्त्विन्द्रा॒ग्निभ्या॒मव॑ बाधामहे॒ तान्।वस॑वो रु॒द्राऽआ॑दि॒त्याऽउ॑परि॒स्पृशं॑ मो॒ग्रं चेत्ता॑रमधिरा॒जम॑क्रन् ॥ (४६)
जो हमारे शत्रु हैं, वे हार जाएं. हम उन शत्रुओं को इंद्र देव और अग्नि की क्षमता से बाधित करें. वसुगण हमारे चित्त को उग्र, पराक्रमी व अधिपति बनाने की कृपा करें. रुद्रगण और आदित्यगण हमारे चित्त को उग्र व पराक्रमी और अधिपति बनाने की कृपा करें. (४६)
Those who are our enemies should be defeated. Let us obstruct those enemies with the ability of Indra Dev and Agni. May Vasugan please make our mind fierce, mighty and overdeva. Rudragana and Adityagan please make our mind fierce, mighty and ruler. (46)