यजुर्वेद (अध्याय 34)
उ॒त नोऽहि॑र्बु॒ध्न्यः शृणोत्व॒जऽएक॑पात् पृथि॒वी स॑मु॒द्रः।विश्वे॑ दे॒वाऽऋ॑ता॒वृधो॑ हुवा॒नाः स्तु॒ता मन्त्राः॑ कविश॒स्ताऽअ॑वन्तु ॥ (५३)
अहिर्बुध्न्य, अज, एकपात, पृथ्वी, समुद्र व सभी देवता हमारी स्तुतियां सुनने की कृपा करें. ये सभी देव सच की बढ़ोतरी करने की कृपा करें. हम सभी देव का आह्वान करते हैं. हम सभी देव की स्तुति करते हैं. कवि यजमान के ये सभी देवगण रक्षक हों. (५३)
Ahirbudhnya, Aj, Ekpat, Earth, Sea and all the gods please listen to our praises. May all these gods please increase the truth. We all invoke God. We all praise God. All these devgans of the poet host should be protectors. (53)