हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 34.7

अध्याय 34 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
पि॒तुं नु स्तो॑षं म॒हो ध॒र्माणं॒ तवि॑षीम्।यस्य॑ त्रि॒तो व्योज॑सा वृ॒त्रं विप॑र्वम॒र्द्दय॑त् ॥ (७)
हम अपने पिता इंद्र देव की स्तुति करते हैं. वे महान्‌ और बलवान हैं. उन्होंने वृत्रासुर को मर्दित कर दिया. उन्होंने तीनों लोकों में अपनी शक्ति को प्रतिष्ठित किया. (७)
We praise our father Indra Dev. They are great and strong. They killed Vritrasura. He established his power in all three worlds. (7)