यजुर्वेद (अध्याय 36)
कया॒ त्वं न॑ऽ ऊ॒त्याभि प्र म॑न्दसे वृषन्।कया॑ स्तो॒तृभ्य॒ऽ आ भ॑र ॥ (७)
हे परमात्मा! आप अपनी रक्षाओं से किस के लिए आनंद की वर्षा नहीं करते हैं ? आप अपने स्तोताओं को जो भरपूर धन प्रदान करते हैं. वह किस को आनंदित नहीं करता ? (७)
O God! For what do you not shower joy with your defenses? The rich wealth you give to your psalmists. Who doesn't he please? (7)