यजुर्वेद (अध्याय 37)
इय॒त्यग्र॑ऽआसीन्म॒खस्य॑ ते॒ऽद्य शिरो॑ राध्यासं देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शीर्ष्णे ॥ (५)
हम पृथ्वी के दिव्य यज्ञ में आप को अग्र स्थान पर बैठाते हैं. हम यज्ञ के लिए आप को यज्ञ के शीर्षस्थ स्थान पर प्रतिष्ठित करते हैं. (५)
We place you at the forefront of the divine sacrifice of the earth. We place you at the top of the yajna for yajna. (5)