हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

अध्याय 38 के सभी मंत्र

यजुर्वेद अध्याय 38 के सभी मंत्र हिंदी अर्थ के साथ

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्याम्।आ द॒देऽदि॑त्यै॒ रास्ना॑ऽसि ॥ (१)
हे यज्ञ ऊर्जा! हम सविता देव की जीवनदायी प्रेरणा से आप को ग्रहण करते हैं. हम अश्विनी देवताओं की भुजाओं से पूषा देव के हाथों से आप को ग्रहण करते हैं. आप देवताओं की माता अदिति को आवृत करने वाली हैं. (१)
O sacrificial energy! We embrace you with the life-giving inspiration of Savita Dev. We receive you from the hands of Pusha Dev with the arms of Ashwini Gods. You are going to cover Aditi, the mother of the gods. (1)

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
इड॒ऽएह्यदि॑त॒ऽएहि॒ सर॑स्व॒त्येहि॑।असा॒वेह्यसा॒वेह्यसा॒वेहि॑ ॥ (२)
हे इड़ा देवी! आप यहां पधारिए. हे अदिति देवी! आप यहां पधारिए. हे सरस्वती देवी! आप यहां पधारने की कृपा कीजिए. (२)
O Ida Devi! You come here. O Aditi Devi! You come here. O Saraswati Devi! Please come here. (2)

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
अदि॑त्यै॒ रास्ना॑सीन्द्रा॒ण्याऽउ॒ष्णीषः॑।पू॒षासि॑ घ॒र्माय॑ दीष्व ॥ (३)
हे यज्ञ ऊर्जा! आप अदिति देव की (मेखला) आवृत्त करने वाली हैं. आप इंद्राणी के सिर का सस्त्र (प्रतिष्ठा सूचक) हैं. आप पोषक हैं. आप यज्ञ जैसे हितकारी कार्यो में अपनी शक्ति को लगाने की कृपा कीजिए. (३)
O sacrificial energy! You are going to cover Aditi Dev's (Mekhala). You are the sastra (prestige indicator) of Indrani's head. You are nutritious. Please put your power in beneficial works like yajna. (3)

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
अ॒श्विभ्यां॑ पिन्वस्व॒ सर॑स्वत्यै पिन्व॒स्वेन्द्राय॑ पिन्वस्व।स्वाहेन्द्र॑व॒त् स्वाहेन्द्र॑व॒त् स्वाहेन्द्र॑वत् ॥ (४)
अश्विनी देव के लिए यह आहुति प्रवाहित हो रही है. आप इसे पीजिए. सरस्वती देवी के पीने के लिए यह आहुति झर रही है. इंद्र देव के पान (पीने) के लिए यह आहुति वह रही है. इंद्र देव के लिए स्वाहा. स्वाहा. स्वाहा. (४)
This sacrifice is flowing for Ashwini Dev. You drink it. This offering is being made for saraswati devi to drink. She has been a sacrifice for Indra Dev's drinking. Swaha for Indra Dev. Let this oblation be for our happine. Let this oblation be for our happine. (4)

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
यस्ते॒ स्तनः॑ शश॒यो यो म॑यो॒भूर्यो र॑त्न॒धा व॑सु॒विद्यः सु॒दत्रः॑।येन॒ विश्वा॒ पुष्य॑सि॒ वार्य्या॑णि॒ सर॑स्वति॒ तमि॒ह धात॑वेऽकः।उ॒र्वन्तरि॑क्ष॒मन्वे॑मि ॥ (५)
हे सरस्वती देवी! आप का दिव्य ज्ञान सुखदायी, कल्याणदायी व समृद्धिदायी है. आप का दिव्य ज्ञान वैसा ही सुखद और आनंददायी है, जैसे मां का स्तन बच्चे के लिए सुखकारी नींद लाने वाला व आनंद देने वाला होता है. बच्चे में उत्तम बल संचरित करता है और उन में उत्तम गुण पैदा करने वाला होता है. (५)
O Saraswati Devi! Your divine knowledge is pleasant, welfare and prosperous. Your divine knowledge is as pleasant and enjoyable as the mother's breast is a happy sleep and pleasure for the child. It transmits good strength in the child and creates good qualities in them. (5)

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
गा॒य॒त्रं छन्दो॑ऽसि॒ त्रैष्टु॑भं॒ छन्दो॑ऽसि॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ त्वा॒ परि॑ गृह्णाम्य॒न्तरि॑क्षे॒णोप॑ यच्छामि। इन्द्रा॑श्विना॒ मधु॑नः सार॒घस्य॑ घर्मं पा॑त॒ वस॑वो॒ यज॑त॒ वाट्। स्वाहा॒ सूर्य्य॑स्य र॒श्मये॑ वृष्टि॒वन॑ये ॥ (६)
हे इंद्र देव! जो यजमान गायत्री छंद में आप की स्तुति करते हैं. आप उन के संरक्षक हैं. जो त्रिष्टुभ्‌ छंद में इंद्र देव की उपासना करते हैं. इंद्र देव उन्हें भी संरक्षण देने बाले हैं. हे अश्विनी देव! हम स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक हेतु आप दोनों का परिग्रहण करते हैं. हम आप से आरोग्य (स्वास्थ्य) की कामना करते हैं. हम इंद्र देव और दोनों अश्‍्विनीकुमारों को अंतरिक्षलोक से अपने पास लाना चाहते हैं. आप दोनों अमृत व ऊर्जा बरसाने की कृपा करें. बसुगण उपयुक्त रीति से यज्ञ कार्य का निर्वाह करें. वे सूर्य की किरणों से अच्छी बरसात पाने के लिए उपयुक्त रीति से यज्ञ करने की कृपा करें. (६)
O Indra Dev! The hosts who praise you in gayatri verses. You are the guardian of them. Those who worship Indra Dev in trishtubh verses. Indra Dev is also going to protect them. O Ashwini Dev! We access both of you to heaven and earthland. We wish you health. We want to bring Indra Dev and both Ashwini Kumars from space. Please both of you shower nectar and energy. Basus should perform the yajna work properly. They should be pleased to perform yajna properly to get good rain from the rays of the sun. (6)

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
स॒मु॒द्राय त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑। सरि॒राय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑।अ॒ना॒धृ॒ष्याय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑। अ॒प्र॒ति॒धृ॒ष्याय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑।अ॒व॒स्यवे॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑। अ॒शि॒मि॒दाय॑ त्वा॒ वाता॑य॒ स्वाहा॑ ॥ (७)
हे वायु! समुद्र के लिए आप को आहुति प्रदान करते हैं. सभी को संरक्षण प्रदान करने के लिए हम आप को आहुति प्रदान करते हैं. हम अपार शक्ति के लिए आप को आहुति प्रदान करते हैं. सभी के वास (संरक्षण) प्रदाता के लिए हम आहुति प्रदान करते हैं. शांतिदायी वायु के लिए आहुति प्रदान करते हैं. आप हमारी ये सभी आहुतियां स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (७)
O wind! Offer you sacrifices for the sea. We offer sacrifices to you to protect everyone. We offer you sacrifices for immense power. We offer sacrifices for the provider of housing for all. They offer sacrifices for peaceful air. Please accept all these sacrifices of ours. (7)

यजुर्वेद (अध्याय 38)

यजुर्वेद:
इन्द्रा॑य त्वा॒ वसु॑मते रु॒द्रव॑ते॒ स्वाहेन्द्रा॑य त्वादि॒त्यव॑ते॒ स्वाहेन्द्रा॑य त्वाभिमाति॒घ्ने स्वाहा॑। स॒वि॒त्रे त्व॑ऽऋभु॒मते॑ विभु॒मते॒ वाज॑वते॒ स्वाहा॒ बृह॒स्पत॑ये त्वा वि॒श्वदे॑व्यावते॒ स्वाहा॑ ॥ (८)
हे इंद्र देव! आप धनवान च शक्तिमान हैं. हम आप के लिए आहुति अर्पित करते हैं. आप आदित्यवान (तेजोमय) हैं. आप के लिए आहुति समर्पित है. हे इंद्र देव! आप अभिमान को समाप्त करने वाले हैं. आप के लिए आहुति समर्पित है. सविता देव सत्यवान हैं. वे धनवान व बलवान हैं. उन के लिए आहुति समर्पित है. सभी देवताओं के लिए हितकारी बृहस्पति के लिए आहुति समर्पित है. (८)
O Indra Dev! You are rich and powerful. We offer sacrifices to you. You are Adityavan (Tejomay). Sacrifice is dedicated to you. O Indra Dev! You are going to end pride. Sacrifice is dedicated to you. Savita Dev is satyavan. They are rich and strong. Sacrifice is dedicated to them. Sacrifice is dedicated to Jupiter, beneficial to all the gods. (8)
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