यजुर्वेद (अध्याय 6)
दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्याम्। आद॑दे॒ नार्य॑सी॒दम॒हꣳ रक्ष॑सां ग्रीवाऽअपि॑कृन्तामि। यवो॑ऽसि य॒वया॒स्मद् द्वेषो॑ य॒वयारा॑तीर्दि॒वे त्वा॒ऽन्तरि॑क्षाय त्वा पृथि॒व्यै त्वा॒ शुन्ध॑न्ताँल्लो॒काः पि॑तृ॒षद॑नाः पितृ॒षद॑नमसि ॥ (१)
हे यज्ञ साधनो! आप देवताओं के नायक हैं. हम आप को सविता द्वारा प्रेरित अश्विनीकुमारों की बांहों से ग्रहण करते हैं. हम आप को पूषा देव के हाथों से ग्रहण करते हैं, जो आर्य नहीं हैं. (आप आइए) आप उन राक्षसों की गरदनों पर प्रहार कीजिए. आप हमारे मित्र हैं. आप हमारे द्वेषियों को हम से दूर करने की कृपा कीजिए. हम स्वर्गलोक, अंतरिक्ष व पृथ्वी के लिए आप को पवित्र करते हैं. आप हमारे लिए पिता की तरह हैं. आप का घर हमारे लिए पिता के घर की तरह है.(१)
O sacrificial instruments! You are the hero of the gods. We receive you from the arms of Ashwinikumars inspired by Savita. We receive you from the hands of Pusha Dev, who is not an Aryan. (You come) you strike the necks of those demons. You are our friend. Please keep our malice away from us. We sanctify you for heaven, space and earth. You are like a father to us. Your house is like a father's house for us. (1)
यजुर्वेद (अध्याय 6)
अ॒ग्रे॒णीर॑सि स्वावे॒शऽउ॑न्नेतॄ॒णामे॒तस्य॑ वित्ता॒दधि॑ त्वा स्थास्यति दे॒वस्त्वा॑ सवि॒ता मध्वा॑नक्तु सुपिप्प॒लाभ्य॒स्त्वौष॑धीभ्यः। द्यामग्रे॑णास्पृक्ष॒ऽआन्तरि॑क्षं॒ मध्ये॑नाप्राः पृथि॒वीमुप॑रेणादृꣳहीः ॥ (२)
हे यज्ञ साधनो! आप अग्रणी हैं. आप अपनी जिम्मेदारी मान कर सब को उन्नति की ओर अग्रसर कीजिए. सविता देव जगत् के स्वामी हैं. वे आप को सुफल ओषधियों से भूषित करने की कृपा करें. आप स्वर्गलोक की ऊंचाइयों को छुएं शरेष्ठ विचारों से अंतरिक्षलोक को पूर्ण कर दीजिए. आप श्रेष्ठ कमाँ से पृथ्वी को ओतप्रोत करने की कृपा कीजिए. (२)
O sacrificial instruments! You are the leader. Accept your responsibility and lead everyone towards progress. Savita Dev is the master of the world. Please bless you with sufal medicines. You touch the heights of heaven, complete the space world with best thoughts. Please imbue the earth with the best of your deeds. (2)
यजुर्वेद (अध्याय 6)
या ते॒ धामा॑न्यु॒श्मसि॒ गम॑ध्यै॒ यत्र॒ गावो॒ भूरि॑शृङ्गाःऽअ॒यासः॑। अत्राह॒ तदु॑रुगा॒यस्य॒ विष्णोः॑ प॒र॒मं प॒दमव॑भारि॒ भूरि॑। ब्र॒ह्म॒वनि॑ त्वा क्षत्र॒वनि॑ रायस्पोष॒वनि॒ पर्यू॑हामि। ब्रह्म॑ दृꣳह क्ष॒त्रं दृ॒ꣳहायु॑र्दृꣳह प्र॒जां दृ॑ꣳह ॥ (३)
विष्णु का जो धाम है, वह सूर्य की किरणों से प्रकाशित है. वह धाम सर्वव्यापक है. हम विष्णु के उस श्रेष्ठ धाम को पाने की इच्छा रखते हैं. आप ब्राह्मणों व क्षत्रियां आदि को यथायोग्य धन और पोषण देते हैं. आप ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों को धन व संतान दीजिए. (३)
The temple of Vishnu is illuminated by the rays of the sun. That dham is omnipresent. We wish to get that best place of Vishnu. You give proper money and nutrition to Brahmins and Kshatriyas etc. You give wealth and children to Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas. (3)
यजुर्वेद (अध्याय 6)
विष्णोः॒ कर्म्मा॑णि पश्यत॒ यतो॑ व्र॒तानि॑ पस्प॒शे। इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑ ॥ (४)
हे यजमानो! हम विष्णु से जुड़ें. हम उन के मित्र हो जाएं. उन के कामों को देखें. हम उन के व्रतों का पालन करें. (४)
O hosts! Let us join Vishnu. Let us be their friends. Look at their works. We follow their fasts. (4)
यजुर्वेद (अध्याय 6)
तद्विष्णोः॑ पर॒मं प॒दꣳ सदा॑ पश्यन्ति सूरयः॑। दि॒वीव॒ चक्षु॒रात॑तम् ॥ (५)
शूरवीर सदैव विष्णु का परम पद स्वर्गलोक में छाए हुए प्रकाश के समान देखते हैं. (५)
Knights always see the supreme position of Vishnu as the light in heaven. (5)
यजुर्वेद (अध्याय 6)
प॒रि॒वीर॑सि॒ परि॑ त्वा॒ दैवी॒र्विशो॑ व्ययन्तां॒ परी॒मं यज॑मान॒ꣳ रायो॑ मनु॒ष्याणाम्। दि॒वः सू॒नुर॑स्ये॒ष ते॑ पृथि॒व्याँल्लो॒कऽआ॑र॒ण्यस्ते॑ प॒शुः ॥ (६)
हे यज्ञ देव! आप सर्वव्यापक हैं. यजमान आप को कणकण में देखते हैं. आप दिन के पुत्र की तरह व्याप्त हैं. पृथ्वीलोक, वन प्रदेश, व पशु भी आप का ही विस्तार है. आप मनुष्यों को धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. (६)
O Sacrificial God! You are omnipresent. Hosts see you in particle particles. You are pervaded like the son of the day. Earth, forest land, and animals are also an extension of you. Please provide money to human beings. (6)
यजुर्वेद (अध्याय 6)
उ॒पा॒वीर॒स्युप॑ दे॒वान् दैवी॒र्विशः॒ प्रागु॑रु॒शिजो॒ वह्नि॑तमान्। देव॑ त्वष्ट॒र्वसु॑ रम ह॒व्या ते॑ स्वदन्ताम् ॥ (७)
हे त्वष्टा देव! आप सर्जक हैं. आप समीप आए हुए की रक्षा करते हैं. आप की कृपा से प्रजा श्रेष्ठ गुणों से संपन्न हो जाए. आप दिव्य गुण संपन्न, तेजस्वी व समर्थ हैं. ये सभी गुण आप की कृपा से विद्वानों को प्राप्त हों. हम आप को रमणीय हवि प्रदान कर रहे हैं. आप उस का आस्वादन करने की कृपा कीजिए. (७)
O God of Tvashta! You are the initiator. You protect the near and dear one. By your grace, the people should be endowed with superior qualities. You are endowed with divine qualities, brightness and capable. May all these qualities be attained by scholars by your grace. We are providing you with delightful havi. Please greet him. (7)
यजुर्वेद (अध्याय 6)
रेव॑ती॒ रम॑ध्वं॒ बृह॑स्पते धा॒रया॒ वसू॑नि। ऋ॒तस्य॑ त्वा देवहविः॒ पाशे॑न प्रति॑मुञ्चामि॒ धर्षा॒ मानु॑षः ॥ (८)
यज्ञ के आचायों ने उत्तम कोटि की हवि के लिए विशाल धाराओं के रूप में धन देने बाले जिन पशुओं को बांधा, उन पशुओं को अब हम मुक्त करते हैं. वे पशु हमें और हमारे यज्ञ के लिए दूध आदि के रूप में धन धारण करते रहें. हम समर्थ बनें. (८)
We now free the animals that the yagya's achas tied in the form of huge streams for the best quality of havi. Those animals should continue to hold money in the form of milk etc. for us and our yajna. Let us be able. (8)