यजुर्वेद (अध्याय 7)
तं प्र॒त्नथा॑ पू॒र्वथा॑ वि॒श्वथे॒मथा॑ ज्ये॒ष्ठता॑तिं बर्हि॒षद॑ꣳ स्व॒र्विद॑म्। प्र॒ती॒ची॒नं वृ॒जनं॑ दोहसे॒ धुनि॑मा॒शुं जय॑न्त॒मनु॒ यासु॒ वर्ध॑से। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि॒ शण्डा॑य त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्वी॒रतां॑ पा॒ह्यप॑मृष्टः॒। शण्डो॑ दे॒वास्त्वा॑ शुक्र॒पाः प्रण॑य॒न्त्वना॑धृष्टासि ॥ (१२)
इंद्र देव बारबार सोमरस को पीते हैं. सोमरस पोषक व आनंददायी है. इंद्र देव आत्मज्ञाता, ज्येष्ठ, कुश के आसन पर विराजते हैं. वे यजमानों के लिए धन का दोहन करते हैं और यजमानों के लिए धन की बढ़ोतरी करते हैं. वे वीर्यरक्षक हैं. उन के लिए सोमरस को कलश में ग्रहण किया गया है. बही उस की मूल योनि है. वे हमें दुष्टों से दूर करें तथा अपने लिए निर्धारित आसन पर विराजने की कृपा करें. (१२)
Indra Dev drinks Somras repeatedly. Somras is nutritious and enjoyable. Indra Dev resides on the seat of self-knowing, jyestha, kush. They exploit money for hosts and increase wealth for hosts. They are virile protectors. For them, Somras has been taken in the kalash. The book is her original vagina. May they distance us from the wicked and bless us with the seat set for them. (12)