यजुर्वेद (अध्याय 7)
उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽस्याग्रय॒णोऽसि॒ स्वाग्रयणः। पा॒हि य॒ज्ञं पा॒हि य॒ज्ञप॑तिं॒ विष्णु॒स्त्वामि॑न्द्रि॒येण॑ पातु॒ विष्णुं त्वं पा॑ह्य॒भि सव॑नानि पाहि ॥ (२०)
हे देवगण! आप के लिए सोमरस को कलश में ग्रहण किया गया है. आप यज्ञ में सर्वप्रथम ग्रहण किए जाने बाले हैं. आप यज्ञ में सर्वप्रथम बुलाए जाने बाले हैं. आप यज्ञ की रक्षा कीजिए. आप यज्ञपति को संरक्षण दीजिए. आप विष्णु की रक्षा कीजिए. उन की रक्षा करें. आप तीनों संध्याओं की रक्षा करने की कृपा कीजिए. (२०)
O Gods! For you, Someras has been eclipsed in the urn. You are the first to be accepted in the yajna. You are the first to be called in the yajna. You protect the yajna. You give protection to yajnapati. You protect Vishnu. Protect them. Please protect the three evenings of you. (20)