हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 7.40

अध्याय 7 → मंत्र 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
म॒हाँ२ऽइन्द्रो॒ यऽओज॑सा प॒र्जन्यो॑ वृष्टि॒माँ२ऽइ॑व। स्तोमै॑र्व॒त्सस्य॑ वावृधे। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि महे॒न्द्राय॑ त्वै॒ष ते॒ योनि॑र्महे॒न्द्राय॑ त्वा ॥ (४०)
हे इंद्र देव! आप महान्‌ और जल वर्षक हैं. आप हम पर ओज बरसाइए. आप उपासक यजमानों की बढ़ोतरी करते हैं. आप को महान्‌ इंद्र देव के लिए उपयाम में ग्रहण किया गया है. बही आप का मूल स्थान है. (४०)
O Indra Dev! You are great and water-rainer. You shower oz on us. You increase the worshiping hosts. You have been absorbed in the upyam for the great Indra Dev. The book is your native place. (40)