यजुर्वेद (अध्याय 7)
अ॒यं वां॑ मित्रावरुणा सु॒तः सोम॑ऽऋतावृधा। ममेदि॒ह श्रु॑त॒ꣳ हव॑म्। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि मि॒त्रावरु॑णाभ्यां त्वा ॥ (९)
हे मित्र देव! हे वरुण देव! आप सत्य की वृद्धि करते हैं. हम आप के पुत्र आप दोनों के लिए इस सोमरस कलश में ग्रहण करते हैं. आप सोमरस का सेवन करने की कृपा कीजिए. (९)
O friend God! O Varun Dev! You increase the truth. We your sons take in this Somerus urn for both of you. Please consume somers. (9)