हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 9.1

अध्याय 9 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
देव॑ सवितः॒ प्रसु॑व य॒ज्ञं प्रसु॑व य॒ज्ञप॑तिं॑ भगा॑य। दि॒व्यो ग॑न्ध॒र्वः के॑त॒पूः केतं॑ नः पुनातु वा॒चस्पति॒र्वाजं॑ नः स्वदतु॒ स्वाहा॑ ॥ (१)
हे सविता! हम आप की कृपा से इस यज्ञ को विधिवत पूरा करें. आप यज्ञपति को सौभाग्यवान बनाने की कृपा कीजिए. आप की किरणें दिव्य हैं. आप उन किरणों से हमारे अन्न को पवित्र कीजिए. हमारा वह अन्न वाचस्पति देव को भी बलवान बनाने वाला हो. वाचस्पति देव के लिए स्वाहा. वह अन्न हमें भी स्वादिष्ट लगे. (१)
O Savita! Let us duly complete this yajna by your grace. Please make Yajnapati fortunate. Your rays are divine. Sanctify our food with those rays. Our food is going to make Vachaspati Dev stronger. Swaha for Vachaspati Dev. We also found that food delicious. (1)