हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 9.8

अध्याय 9 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वात॑रꣳहा भव वाजिन् यु॒ज्यमा॑न॒ऽइन्द्र॑स्येव॒ दक्षि॑णः श्रि॒यैधि॑। यु॒ञ्जन्तु॑ त्वा म॒रुतो॑ वि॒श्ववे॑दस॒ऽआ ते॒ त्वष्टा॑ प॒त्सु ज॒वं द॑धातु ॥ (८)
हे अग्नि! आप बलवान हैं. आप रथ में जुत कर वायु की तरह वेगवान बन जाइए. आप इंद्र देव के दक्षिणी भाग की शोभा बढ़ाने की कृपा कीजिए. आप को मरुद्गण रथ में जोतने की कृपा करें. त्वष्टा देव! आप पैरों में बल धारण कीजिए. (८)
O agni! You are strong. You jump in the chariot and become as fast as the wind. Please beautify the southern part of Indra Dev. Please plough you in the desert chariot. God of God! You have strength in your feet. (8)