अथर्ववेद (कांड 1)
ए॒षा ते॑ राजन्क॒न्या॑ व॒धूर्नि धू॑यतां यम । सा मा॒तुर्ब॑ध्यतां गृ॒हे ऽथो॒ भ्रातु॒रथो॑ पि॒तुः ॥ (२)
हे सुशोभित सोम! यह कन्या आप की पत्नी है, क्योंकि इस ने पहले आप को स्वीकार किया है, इसलिए यह पतिगृह से निकाल दी जानी चाहिए. यह कन्या चिरकाल तक अपने पिता एवं भाई के घर पड़ी रहे. (२)
O beautiful Mon! This girl is your wife, because she has accepted you before, so she should be removed from the husband's house. This girl stayed in her father and brother's house for a long time. (2)