हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
भग॑मस्या॒ वर्च॒ आदि॒ष्यधि॑ वृ॒क्षादि॑व॒ स्रज॑म् । म॒हाबु॑ध्न इव॒ पर्व॑तो॒ ज्योक्पि॒तृष्वा॑स्ताम् ॥ (१)
मनुष्य जिस प्रकार वृक्ष से माला बनाने हेतु फूल तोड़ता है, उसी प्रकार मैं इस स्त्री के भाग्य और तेज को स्वीकार करता हूं. धरती में भीतर तक धंसा हुआ पर्वत जिस प्रकार स्थिर रहता है, उसी प्रकार यह बुरे भाग्य वाली स्त्री चिरकाल तक पिता के घर रहे अर्थात्‌ यह कभी पति का मुख न देखे. (१)
Just as a man plucks flowers to make garlands from a tree, I accept the fate and glory of this woman. Just as the mountain buried deep inside the earth remains stable, in the same way, this woman with bad luck should stay in the father's house forever, that is, she should never see the face of her husband. (1)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
ए॒षा ते॑ राजन्क॒न्या॑ व॒धूर्नि धू॑यतां यम । सा मा॒तुर्ब॑ध्यतां गृ॒हे ऽथो॒ भ्रातु॒रथो॑ पि॒तुः ॥ (२)
हे सुशोभित सोम! यह कन्या आप की पत्नी है, क्योंकि इस ने पहले आप को स्वीकार किया है, इसलिए यह पतिगृह से निकाल दी जानी चाहिए. यह कन्या चिरकाल तक अपने पिता एवं भाई के घर पड़ी रहे. (२)
O beautiful Mon! This girl is your wife, because she has accepted you before, so she should be removed from the husband's house. This girl stayed in her father and brother's house for a long time. (2)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
ए॒षा ते॑ कुल॒पा रा॑ज॒न्तामु॑ ते॒ परि॑ दद्मसि । ज्योक्पि॒तृष्वा॑साता॒ आ शी॒र्ष्णः स॒मोप्या॑त् ॥ (३)
हे सुशोभित सोम! यह स्त्री पतिव्रता होने के कारण आप के कुल का पालन करने वाली है, इसलिए हम इसे रक्षा के लिए आप को देते हैं. यह तब तक अपने पिता के घर पर रहे. यह धरती पर सिर गिरने तक अर्थात्‌ मरण पर्यंत अपने पिता के घर रहे. (३)
O beautiful Mon! This woman being a husband is going to follow your clan, so we give it to you for protection. He stayed at his father's house till then. He stayed at his father's house till his head fell on the earth, that is, till death. (3)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
असि॑तस्य ते॒ ब्रह्म॑णा क॒श्यप॑स्य॒ गय॑स्य च । अ॑न्तःको॒शमि॑व जा॒मयो ऽपि॑ नह्यामि ते॒ भग॑म् ॥ (४)
हे स्त्री! मैं तेरे भाग्य को असित, ब्रह्मा, कश्यप एवं गय ऋषियों के मंत्रों से इस प्रकार सुरक्षित करता हूं, जिस प्रकार स्त्रियां घरों में अपना धन, वस्त्र आदि छिपा कर रखती हैं. (४)
Oh woman! I protect your fate with the mantras of Asit, Brahma, Kashyap and Gay rishis, just as women hide their wealth, clothes, etc. in their homes. (4)