हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.14.4

कांड 1 → सूक्त 14 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
असि॑तस्य ते॒ ब्रह्म॑णा क॒श्यप॑स्य॒ गय॑स्य च । अ॑न्तःको॒शमि॑व जा॒मयो ऽपि॑ नह्यामि ते॒ भग॑म् ॥ (४)
हे स्त्री! मैं तेरे भाग्य को असित, ब्रह्मा, कश्यप एवं गय ऋषियों के मंत्रों से इस प्रकार सुरक्षित करता हूं, जिस प्रकार स्त्रियां घरों में अपना धन, वस्त्र आदि छिपा कर रखती हैं. (४)
Oh woman! I protect your fate with the mantras of Asit, Brahma, Kashyap and Gay rishis, just as women hide their wealth, clothes, etc. in their homes. (4)