हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
आशा॑नामाशापा॒लेभ्य॑श्च॒तुर्भ्यो॑ अ॒मृते॑भ्यः । इ॒दं भू॒तस्याध्य॑क्षेभ्यो वि॒धेम॑ ह॒विषा॑ व॒यम् ॥ (१)
पूर्व आदि दिशाओं की रक्षा करने वाले एवं कभी न मरने वाले इंद्र, यम आदि चार देवों के लिए हम इस भाग में मंत्रों के साथ आहुति देते हैं. वे देव सभी प्राणियों के स्वामी हैं. (१)
We offer prayers with mantras in this part for the four gods like Indra, Yama etc. who protect the east and never die. He is the swami of all beings. (1)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
य आशा॑नामाशापा॒लाश्च॒त्वार॒ स्थन॑ देवाः । ते नो॒ निरृ॑त्याः॒ पाशे॑भ्यो मु॒ञ्चतांह॑सोअंहसः ॥ (२)
जो दिशाओं का पालन करने वाले इंद्र आदि चार देव हैं, वे हमें मृत्यु देव के पाशों से छुड़ाएं तथा पापों से हमारी रक्षा करें. (२)
May indra and other four gods, who follow the directions, free us from the traps of the god of death and protect us from sins. (2)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
अस्रा॑मस्त्वा ह॒विषा॑ यजा॒म्यश्लो॑णस्त्वा घृ॒तेन॑ जुहोमि । य आशा॑नामाशापा॒लस्तु॒रीयो॑ दे॒वः स नः॑ सुभू॒तमे॒ह व॑क्षत् ॥ (३)
हे धन देने वाले देव कुबेर! मैं अपने अभिमत धन आदि प्राप्त करने के लिए हवि से इंद्र आदि देवों की प्रसन्नता के लिए हवन करता हूं. दिशाओं की रक्षा करने वाले इंद्र आदि देवों में जो चौथे देव कुबेर हैं, वे इस यज्ञ में हमें स्वर्ण, रजत आदि धन दें. (३)
O God kubera, the god who gives wealth! I perform havan for the happiness of Indra etc. gods from Havi to get my opinion money etc. Kubera, the fourth god among the gods of Indra, who protects the directions, should give us gold, silver etc. in this yagya. (3)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
स्व॒स्ति मा॒त्र उ॒त पि॒त्रे नो॑ अस्तु स्व॒स्ति गोभ्यो॒ जग॑ते॒ पुरु॑षेभ्यः । विश्व॑म्सुभू॒तम्सु॑वि॒दत्रं॑ नो अस्तु॒ ज्योगे॒व दृ॑शेम॒ सूर्य॑म् ॥ (४)
हमारी माता, हमारे पिता, हमारी गायों और सारे संसार का कल्याण हो. हमारी माता आदि उत्तम धन एवं श्रेष्ठ ज्ञान वाले हैं. हम सौ वर्ष तक सूर्य के दर्शन करते रहें. (४)
May our mother, our father, our cows and the whole world be well-being. Our mother etc. is of good wealth and good knowledge. We continued to see the sun for a hundred years. (4)