अथर्ववेद (कांड 1)
स्व॒स्ति मा॒त्र उ॒त पि॒त्रे नो॑ अस्तु स्व॒स्ति गोभ्यो॒ जग॑ते॒ पुरु॑षेभ्यः । विश्व॑म्सुभू॒तम्सु॑वि॒दत्रं॑ नो अस्तु॒ ज्योगे॒व दृ॑शेम॒ सूर्य॑म् ॥ (४)
हमारी माता, हमारे पिता, हमारी गायों और सारे संसार का कल्याण हो. हमारी माता आदि उत्तम धन एवं श्रेष्ठ ज्ञान वाले हैं. हम सौ वर्ष तक सूर्य के दर्शन करते रहें. (४)
May our mother, our father, our cows and the whole world be well-being. Our mother etc. is of good wealth and good knowledge. We continued to see the sun for a hundred years. (4)