अथर्ववेद (कांड 1)
विश्व॑म॒न्याम॑भी॒वार॒ तद॒न्यस्या॒मधि॑ श्रि॒तम् । दि॒वे च॑ वि॒श्ववे॑दसे पृथि॒व्यै चा॑करं॒ नमः॑ ॥ (४)
सारा संसार आकाश से चारों ओर से घिरा हुआ है. यह संसार पृथ्वी पर आश्रित है. मैं संसार के धन के रूप में स्थित द्युलोक को तथा पृथ्वी को नमस्कार करता हूं. (४)
The whole world is surrounded by the sky. This world is dependent on earth. I salute the earth and the world in the form of wealth. (4)