हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.34.4

कांड 1 → सूक्त 34 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 34
मधो॑रस्मि॒ मधु॑तरो म॒दुघा॒न्मधु॑मत्तरः । मामित्किल॒ त्वं वनाः॒ शाखां॒ मधु॑मतीमिव ॥ (४)
हे मधु लता! मैं तुझ से उत्पन्न होने वाले शहद से भी अधिक मधुर हूं. मैं शहद टपकाने वाले पदार्थ से भी अधिक मधुर हूं. तुम निश्चय ही केवल मुझे उसी प्रकार प्राप्त हो जाओ, जिस प्रकार शहद वाली डाल के पास लोग पहुंच जाते हैं. (४)
O Madhu Lata! I am sweeter than the honey you produce. I am sweeter than a honey-dripping substance. You must only receive Me in the same way as people reach the branch of honey. (4)