अथर्ववेद (कांड 10)
अ॒यं पन्थाः॑ कृ॒त्य॒ इति॑ त्वा नयामोऽभि॒प्रहि॑तां॒ प्रति॑ त्वा॒ प्र हि॑ण्मः । तेना॒भि या॑हि भञ्ज॒त्यन॑स्वतीव वा॒हिनी॑ वि॒श्वरू॑पा कुरू॒टिनी॑ ॥ (१५)
हे कृत्या! यह मार्ग है. तू शत्रु के द्वारा हमारे पास भेजी गई है. हम तुझे उसी के पास भेजते हैं. तू बैलगाड़ियों, वाणी एवं अनेक वीरों से युक्त सेना के समान हल्ला करती हुई हमारे शत्रुओं पर आक्रमण कर. हम मंत्र के बल से तुझे लौटाते हैं. (१५)
This is an act! This is the way. You have been sent to us by the enemy. We send you to him. Attack our enemies like an army of bullock carts, speech and many heroes. We return you with the power of mantras. (15)