अथर्ववेद (कांड 10)
उ॒पाहृ॑त॒मनु॑बुद्धं॒ निखा॑तं॒ वैरं॑ त्सा॒र्यन्व॑विदाम॒ कर्त्र॑म् । तदे॑तु॒ यत॒ आभृ॑तं॒ तत्राश्व॑ इव॒ वि व॑र्ततां॒ हन्तु॑ कृत्या॒कृतः॑ प्र॒जाम् ॥ (१९)
कपटपूर्ण वैर को हम उसी के पास लौटाते हैं और वैर के कारण बनाई गई कृत्या को हम उसी के निर्माणकर्ता के पास वापस भेजते हैं. कृत्या घोड़े के समान अपने स्थान पर चली जाए और कृत्या का प्रयोग करने वाले की संतान का विनाश कर दे. (१९)
We return the fraudulent enmity to him and we send the act created due to enmity back to the creator of the same. The krita should go to its place like a horse and destroy the child of the person who uses the krita. (19)