हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.1.27

कांड 10 → सूक्त 1 → मंत्र 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
उ॒त ह॑न्ति पूर्वा॒सिनं॑ प्रत्या॒दायाप॑र॒ इष्वा॑ । उ॒त पूर्व॑स्य निघ्न॒तो नि ह॒न्त्यप॑रः॒ प्रति॑ ॥ (२७)
प्रथम बैठे हुए व्यक्ति को दूसरा मनुष्य बाण से मार डालता है. मारने वाले को अन्य मनुष्य मार डालता है. हे कृत्या! तू अपने बनाने वाले के समीप लौट जा. (२७)
The first sitting person is killed by the second man with an arrow. The killer kills other human beings. O act! Return to your Creator. (27)