हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.1.29

कांड 10 → सूक्त 1 → मंत्र 29 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
अ॑नागोह॒त्या वै भी॒मा कृ॑त्ये॒ मा नो॒ गामश्वं॒ पुरु॑षं वधीः । यत्र॑य॒त्रासि॒ निहि॑ता॒ तत॒स्त्वोत्था॑पयामसि प॒र्णाल्लघी॑यसी भव ॥ (२९)
निरपराध की हत्या करना भयंकर कर्म है. तू हमारी गायों, अश्वो, और पुरुषों की हत्या मत कर. तुझे जहांजहां स्थापित किया गया है, वहांवहां से हम तुझे हटाते हैं. तू पत्ते से भी हलकी हो जा. (२९)
Killing innocent is a terrible act. Don't kill our cows, horses, and men. Where you have been established, we remove you from there. You become lighter than the leaf. (29)