हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.1.9

कांड 10 → सूक्त 1 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
ये त्वा॑ कृ॒त्वाले॑भि॒रे वि॑द्व॒ला अ॑भिचा॒रिणः॑ । शं॒भ्वी॒दं कृ॑त्या॒दूष॑णं प्रतिव॒र्त्म पु॑नःस॒रं तेन॑ त्वा स्नपयामसि ॥ (९)
हे कृत्या! जिस जादूटोना करने वाले ने तुझे प्राप्त किया है, वह मार्ग को दूषित कर के बुझे लौटा सकता है. हम उसी के रक्त से तुझे स्नान कराते हैं. (९)
O act! The sorcerer who has received you can defile the way and return to the extinguished. We bathe you with his blood. (9)