हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.10.11

कांड 10 → सूक्त 10 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
यत्ते॑ क्रु॒द्धो धन॑पति॒रा क्षी॒रमह॑रद्वशे । इ॒दं तद॒द्य नाक॑स्त्रि॒षु पात्रे॑षु रक्षति ॥ (११)
हे वशा गौ! जब क्रोध में भरा हुआ धनपति अर्थात्‌ कुबेर तेरा दूध लेता है, तो उसे स्वर्ग तीन पात्रों में सुरक्षित रखता है. (११)
O Vasa Gau! When the rich man, i.e. Kubera, filled in anger, takes your milk, heaven preserves it in three vessels. (11)