हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.10.13

कांड 10 → सूक्त 10 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
सं हि सोमे॒नाग॑त॒ समु॒ सर्वे॑ण प॒द्वता॑ । व॒शा स॑मु॒द्रमध्य॑ष्ठाद्गन्ध॒र्वैः क॒लिभिः॑ स॒ह ॥ (१३)
वह वशा गौ चरणों वाले सभी मनुष्यों के साथ सोमरस ले कर आई. वह गौ कलह करने वाले गंधर्वो के साथ सागर में प्रतिष्ठा पाती रही. (१३)
She brought Someras with all the human beings with vasha gau feet. (13)