हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.10.15

कांड 10 → सूक्त 10 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
सं हि सूर्ये॑णागत॒ समु॒ सर्वे॑ण॒ चक्षु॑षा । व॒शा स॑मु॒द्रमत्य॑ख्यद्भ॒द्रा ज्योतीं॑षि॒ बिभ्र॑ती ॥ (१५)
सभी नेत्रों के साथ वशा गौ सूर्य से मिली. कल्याणकारिणी उस गौ ने प्रकाश को धारण करते हुए सागर से भी अधिक प्रसिद्धि प्राप्त की. (१५)
With all the eyes, Vasha Gau met the sun. Kalyankarini The cow gained more fame than the ocean while wearing light. (15)