हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.10.19

कांड 10 → सूक्त 10 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
ऊ॒र्ध्वो बि॒न्दुरुद॑चर॒द्ब्रह्म॑णः॒ ककु॑दा॒दधि॑ । तत॒स्त्वं ज॑ज्ञिषे वशे॒ ततो॒ होता॑जायत ॥ (१९)
ब्रह्म के ककुद अर्थात्‌ ऊपर वाले भाग से एक बूंद उछली. हे वशा गौ! तू उसी बूंद से उत्पन्न हुई है तथा उसी बूंद से हवन करने वाले होता उत्पन्न हुए हैं. (१९)
A drop bounced from the kakud of Brahma i.e. the upper part. O Vasa Gau! You have been born from the same drop and those who perform havan have been born from the same drop. (19)